किसी अपने को गुरुग्राम के एक टॉप अस्पताल में सर्जरी की ज़रूरत है। काउंटर पर दिया गया अनुमान है ₹4.2 लाख।
लेकिन वही सर्जन पास के ही एक JCI-मान्यता प्राप्त अस्पताल में वही प्रक्रिया ₹2.8 लाख में करते हैं।
आपको यह कैसे पता चलेगा?
भारतीय हेल्थकेयर सिस्टम में क्लिनिकल केयर दुनिया-स्तरीय है, लेकिन एडमिनिस्ट्रेटिव अनुभव अक्सर एक “ब्लैक बॉक्स” होता है।
HealAssistant आपका प्रोफेशनल केयर नेविगेटर होता है—एक जानकार पार्टनर जो अस्पताल की भाषा समझता है और बोलता है, ताकि आपको सबसे अच्छा क्लिनिकल रिज़ल्ट मिले, वो भी बाज़ार की सही और वाजिब कीमत पर।
हम किसी लीगल एडवोकेट की तरह अस्पताल से लड़ते नहीं हैं। हम उनके साथ मिलकर काम करने वाले ऑपरेशनल पार्टनर हैं—ताकि उनकी प्रशासनिक प्रक्रिया आपके लिए काम करे, आपके ख़िलाफ़ नहीं।
HealAssistant आपकी कैसे सुरक्षा करता है
1. सटीक डॉक्टर मैचिंग और सेकंड ओपिनियन
सही डॉक्टर चुनना सिर्फ़ डिपार्टमेंट के नाम से तय नहीं होता।
दोनों डॉक्टर भले ही Ophthalmologist हों, लेकिन एक विश्व-स्तरीय Cataract एक्सपर्ट हो सकता है, जबकि दूसरा LASIK में विशेषज्ञ।
सब-स्पेशलिटी नेविगेशन:
हमें ठीक-ठीक पता होता है कि आपकी ज़रूरत वाली प्रक्रिया में कौन-सा सर्जन सबसे आगे है—ताकि आपको सिर्फ़ “अच्छा डॉक्टर” नहीं, बल्कि आपकी बीमारी के लिए सही डॉक्टर मिले।
वैलिडेशन:
हम हमेशा निष्पक्ष सेकंड ओपिनियन की व्यवस्था करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डायग्नोसिस सही है और सर्जरी वाकई ज़रूरी है—उससे पहले कि आप कोई बड़ा फैसला लें।
2. सही कीमत की खोज और तुलना
ज़्यादातर मरीज़ सिर्फ़ ब्रांड नाम देखकर अस्पताल चुन लेते हैं और 30–40% तक ज़्यादा भुगतान कर बैठते हैं।
हम Medanta, Fortis और Max जैसे नेटवर्क्स के रियल-टाइम टैरिफ डेटा से सर्जरी पैकेज की तुलना करते हैं।
डॉक्टर मोबिलिटी:
अक्सर हम ऐसे “बुटीक” अस्पताल ढूंढते हैं जहाँ आपका पसंदीदा सर्जन काफी कम कीमत में ऑपरेट करता है—क्योंकि वहाँ रूम रेंट और कंज़्यूमेबल्स का ओवरहेड कम होता है।
असल ज़िंदगी का असर:
हाल ही में गुरुग्राम के एक परिवार को हार्ट प्रोसीजर के लिए ₹6.5 लाख का कोट मिला।
हमने पता लगाया कि वही सर्जन पास के एक स्पेशलाइज़्ड कार्डियक सेंटर में वही प्रक्रिया करता है—जिससे परिवार को कुल ₹1.92 लाख की बचत हुई।
3. रियल-टाइम बिल ऑडिट
80% से ज़्यादा ओपन-बिलिंग मामलों में मेडिकल बिलिंग एरर्स पाई जाती हैं।
कार्ड स्वाइप करने से पहले, आपका HealAssistant लाइव ऑडिट करता है और पकड़ता है:
डुप्लिकेट चार्जेस:
आइटमाइज़्ड बिल में “घोस्ट कंज़्यूमेबल्स” — जैसे ग्लव्स, सिरिंज और मास्क—जो थोक में बिल कर दिए जाते हैं लेकिन इस्तेमाल नहीं होते।
3-घंटे का डिस्चार्ज नियम:
2025 के IRDAI नियमों के अनुसार, फ़ाइनल बिल के 3 घंटे के भीतर डिस्चार्ज होना चाहिए।
हम “TPA चेज़” संभालते हैं, ताकि प्रशासनिक देरी की वजह से आपको एक अतिरिक्त दिन का चार्ज (अक्सर ₹15,000+) न देना पड़े।
4. इंश्योरेंस, TPA मैनेजमेंट और रिमोट एडवोकेसी
“Cashless Everywhere” तभी काम करता है जब सारे प्रोटोकॉल सही से फॉलो हों।
हम अनिवार्य 48-घंटे की नोटिफिकेशन फाइल करवाते हैं, ताकि “टेक्निकल रिजेक्शन” न हो, और देरी होने पर सीधे इंश्योरर के Grievance Redressal Officer तक मामला बढ़ाते हैं।
रिमोट कंट्रोल:
जो परिवार साथ नहीं रह पाते (जैसे NRI), उनके लिए हम “माइक्रो-रिपोर्टिंग” देते हैं—
राउंड्स की ऑडियो रिकॉर्डिंग और 24/7 वाइटल्स लॉग—ताकि हज़ारों किलोमीटर दूर रहकर भी पूरी निगरानी बनी रहे।
कब आपको HealAssistant की ज़रूरत नहीं होती
हम पारदर्शिता में विश्वास करते हैं और तभी आगे आते हैं जब हम सच में वैल्यू जोड़ सकें।
इन मामलों में आपको शायद हमारी ज़रूरत न पड़े:
इमरजेंसी केस:
हार्ट अटैक, स्ट्रोक या गंभीर ट्रॉमा में तुरंत नज़दीकी ER जाएँ। समय ही जीवन है।
मरीज़ के स्थिर होने के बाद हम इंश्योरेंस और बिलिंग संभाल सकते हैं।
रूटीन OPD:
वायरल फीवर, फ्लू, वैक्सीनेशन या सामान्य फॉलो-अप में प्रशासनिक झंझट कम होता है।
ऐसे मामलों में प्रोफेशनल नेविगेशन आमतौर पर ज़रूरी नहीं होता।
ज़्यादा भुगतान बंद करें। सही रास्ता चुनें।
सिर्फ़ एडमिशन फॉर्म पर साइन न करें।
अगर आपकी सर्जरी प्लान्ड है या आपका कोई अपना अस्पताल में है, तो हमें आपका केस रिव्यू करने दें।
👉 विज़िट करें: https://www.healassist.in/gurugram/user-journey/eye-care
कोई बाध्यता नहीं। सिर्फ़ वो जानकारी, जिसकी मदद से आप सही फैसला ले सकें।